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Sunday, 8 November 2020

मां तुम बिन

सिर्फ़ जिंदा ही हैं हम मां 
जीना क्या है ये तो हम भूल ही गए हैं 
तुम थी तो त्यौहार  त्यौहार सा लगता था
अब तो ये केवल रस्में ही रह गई हैं
तुम थी तो रसोई से खुश्बूयें आती थी
अब तो केवल बर्तनों की आवाजें आती हैं
तुम थी तो हम कितना झगड़ते लड़ते रहते थे
अब तो केवल खामोशियों ही पसरी रहती है
मां तुम बिन सिर्फ़ और सिर्फ़ खालीपन हैं
कुछ भी नहीं रहा शकुंतला के इस जीवन में
शकुंतला 
अयोध्या ( फैजाबाद)


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