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Thursday, 12 October 2017

सान्निध्य आपका

आप करीब रहो या कोसों दूर रहो
बस स्वस्थ रहो सानंद रहो

मन में हर पल उत्साह रहे
होंठों पर स्मित मन्द रहे

खुशियाँ राहों में बिछ जाए
जीवन में हर पल खुशहाली हो

दिन ईद रात दीपावली हो
दूरियां हमारी खत्म हो जाये

कहिये ज़नाब कब तल्क शकुंतला को
मिलेगा सुमुखि सान्निध्य आपका
           ©®@शकुंतला
                  फैज़ाबाद

अनुरोध

मेरा मन बहुत विचलित हो उठता है जब भी मैं कटे हुए पेड़ो को देखती हूं लगता है जैसे मेरा अंग किसी ने काट दिया हो बहुत ही असहनीय पीढ़ा होती हैं....