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Sunday, 26 July 2026

गौरिया

गौरैया

नन्हे पंखों में धूप समेटे,
आँगन-आँगन गीत सुनाए।
तिनका-तिनका जोड़ बनाकर,
जीवन का विश्वास सिखाए।

न ऊँचे पर्वत माँगे उसने,
न सोने-चाँदी का श्रृंगार।
छोटी-सी चोंच, सरल-सा मन,
फिर भी कितना बड़ा उपकार।

भोर की पहली किरण के संग,
चहक उठे उसका मधुर गान।
सूनी चौखट भी मुस्काती,
भर जाता हर घर-आँगन।

आज न जाने कहाँ छिपी है,
सूने पड़े हैं उसके द्वार।
आओ मिलकर वृक्ष लगाएँ,
रखें जल, दाना हर बार।

फिर लौटेगी वही गौरैया,
फिर गूँजेगा मधुर विहान।
उसके संग ही जीवित होगा,
धरती का मुस्काता सम्मान।
शकुन्तला अयोध्या

मोगरे की मुस्कान

मोगरे की मुस्कान 🌼

सफ़ेद कलियों की मीठी हँसी,
धरती पर उतरी जैसे चाँदनी बसी।
हर पंखुड़ी में सादगी का श्रृंगार,
महक से भर दे सारा संसार।

हर डाली पर मुस्कुराती बहार,
मन को देती प्रेम का उपहार।
मंद पवन जब इन्हें सहलाती,
हर कली मधुर गीत सुनाती।

टोकरी भर खुशबू का ख़ज़ाना,
प्रकृति ने कितना सुंदर है सजाना।
इन फूलों से सीखो जीवन का सार,
बाँटो प्रेम, महको हर बार।

मोगरे की महक यही कहती है—
"जो स्वयं महकता है, वही संसार को भी महका देता है।" 🌿🤍

सादगी

पीले दुपट्टे की उजली छाँव में,
सादगी ने आज श्रृंगार पहन लिया।
हाथों में महकते फूलों का गुच्छा,
जैसे मन ने सावन को थाम लिया।

चेहरे की शांत, मधुर मुस्कान,
शब्दों से पहले बोल जाती है।
बिन कुछ कहे ही हर मिलने वाले को,
अपनापन घोल जाती है।

न पद का गर्व, न रूप का अभिमान,
बस विनम्रता का सुंदर आभूषण है।
जीवन की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि में,
कर्म ही आपका सच्चा भूषण है।

फूलों की यह सुगंध क्षणिक होगी,
पर सद्भाव की महक अमर रहेगी।
जो प्रेम बाँटते हैं मुस्कानों के साथ,
उनकी पहचान सदा अमिट रहेगी।

गौरिया

गौरैया नन्हे पंखों में धूप समेटे, आँगन-आँगन गीत सुनाए। तिनका-तिनका जोड़ बनाकर, जीवन का विश्वास सिखाए। न ऊँचे पर्वत माँगे उसने, न सोने-चाँदी ...