पीले दुपट्टे की उजली छाँव में,
सादगी ने आज श्रृंगार पहन लिया।
हाथों में महकते फूलों का गुच्छा,
जैसे मन ने सावन को थाम लिया।
चेहरे की शांत, मधुर मुस्कान,
शब्दों से पहले बोल जाती है।
बिन कुछ कहे ही हर मिलने वाले को,
अपनापन घोल जाती है।
न पद का गर्व, न रूप का अभिमान,
बस विनम्रता का सुंदर आभूषण है।
जीवन की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि में,
कर्म ही आपका सच्चा भूषण है।
फूलों की यह सुगंध क्षणिक होगी,
पर सद्भाव की महक अमर रहेगी।
जो प्रेम बाँटते हैं मुस्कानों के साथ,
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