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Friday, 19 September 2025
भटका युवा
आज के युवा... बस उन्हें तो बाइक लड़की और हाथ में आईफोन बस इनकी मंजिल यही तक सीमित है....ये क्या जाने क्रांतिकारी क्या होता हैं 18 साल की छोटी सी उम्र में खुदीराम बोस जैसे युवाओं ने देश के लिए बलिदान दिया.... आज के युवा शर्म आती हैं मुझे इन्हें युवा कहते हुए ये क्या करेंगे देश के लिए जो खुद को ही आजाद नहीं कर पा रहे है इस सोशल मीडिया जैसी बेड़ियों से... मैं बहुत चिंतित हूं इस आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर कैसे इन तुच्छ चीजों से इनको बचाया जाय।
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माँ के हाथों की खीर और शरद पूर्णिमा
### 🌕 माँ के हाथों की खीर और शरद पूर्णिमा हर वर्ष आती है शरद पूर्णिमा, चाँद वही, वही रात सुहानी, अमृत बरसता है आज भी नभ से, पर सूनी है माँ ...
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खालीपन क्या होता हैं? ये किसी बूढ़ी मां से पूछो जो अपने बच्चों से मिलने की आस लगाए दरवाज़े पर बैठे रास्ता निहारती रहती हैं सोचती है क्या ये ...
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उस चांद से पूछो ? तुम हर दिन घटते बढ़ते क्यों रहते हो ? कभी तो लगता हैं हर दिन बढ़ रहा है प्यार तुम्हारा फिर भ्रम टूटने लगता है ...
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पथ वरण करना सरल है, पथिक बनना ही कठिन है। दुख भरी एक कहानी सुनकर, अश्रु बहाना तो सरल है। बांध कर पलकों में सावन, मुस्कुराना ही कठिन है...
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