तुम से पहले भी
इश्क हुआ था
हमें अपनी मां से
जिसमें सिर्फ़ और सिर्फ़
प्यार मिला था हमें
वो पहला प्यार हम
कभी न भूल पाएंगे
चाहे जितने भी
कर लो जतन पर
ऐसा इश्क दुबारा
न कर पाएंगे
हम किसी से
शकुंतला" वैभवी "
अयोध्या
बिन छाँव की सड़क मैं सड़क हूँ, कभी मेरे संग चलते थे पेड़ों के साये, पंछियों के गीत, और राहगीरों की मुस्कान। आज धूप मेरे सीने पर अंगार बनकर उ...
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